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In Search Of The Solitude || me | by VisualsDiary
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In Search Of The Solitude || me

गुज़र रहा है वक़्त

मेरी ही मोजुदगी में,

फिकरे बयां हम क्या करे,

सफ़र है ज़िन्दगी का दूर तक,

एक ही है रास्ता,

बस चलना है और चलते ही जाना है....

 

I come to remember one poem while I used to read long ago. Its from

" Saint Kabir"

 

आसा का ईंधण करूँ, मनसा करूँ बिभूति ।

जोगी फेरि फिल करूँ, यौं बिनना वो सूति.

 

[मतलब यह कि आशाएँ सारी जलाकर खाक कर दूँगा और निस्पृह होकर जीवन का क्रम इसी ताने-बाने पर चलाऊँगा ।

 

I am not sufficient to translate it in English. If some one can, Help.

 

  

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Taken on December 18, 2011